GST क्या है ? GST कितने प्रकार के होते है ?

GST होता है ये की , जो व्यक्ति वस्तुओं का खरीदारी करता है , या उनके सेवाओं को इस्तेमाल करता है , उसको GST का टैक्स चुकाना पड़ता है ।

पहले Excise Duty, VAT, Entry Tax, Service Tax इसी तरह का टैक्स इस्तेमाल हो रहा था । बाद में उसको हटाकर GST लाया गया है । GST को भारत में 1जुलाई 2017 से लागू किया गया है ।

GST क्या है ? GST कितने प्रकार के होते है ?
GST क्या है ? GST कितने प्रकार के होते है ?

GST का फुलफॉर्म

GST का फुलफॉर्म होता है Goods And Service Tax । हिंदी में GST का अर्थ होता है माल एवं सेवा कर।
यानी जो किसी व्यक्ति को माल खरीदना होता है या उनके सेवाओं को इस्तेमाल करना होता है , उनको , उसी माल का GST कर चुकाना पड़ता है । जो गवर्मेंट के फंड में जाता है । यानी सरकार को उसी माल का टैक्स भरना पड़ता है ।

GST कितने प्रकार के होते है ?

GST जो है , ये 4 प्रकार की होते है ।

  • C- GST ( Central GST )
  • S – GST ( State GST )
  • UT – GST ( Union Territory GST )
  • I – GST ( Integrated GST )

4 प्रकार की GST के बारे में पूरी जानकारी

चलो हम जानते है की 4 प्रकार की जो ये GST होते है , इस 4 प्रकार के GST के बारे में पूरी जानकारी ।
अगर कोई व्यक्ति अपने ही स्टेट में वस्तुओं की खरीदारी करता है तो उसको C – GST ( Central GST ) भरना पड़ेगा और इसके साथ S – GST ( State GST ) भी भरना पड़ेगा ।

क्यू की C – GST जो है , वो Central GST है और ये Central Government के पास जाता है । और S – GST जो है , वो State GST है और ये State Government के पास जाता है ।

मान लीजिए आप ने अपने ही स्टेट में एक समान खरीदा है । और आपको उस समान का 9% GST भरना है , तो आपको C – GST ( Central GST ) और S – GST ( State GST ) दोनों का ही टैक्स भरना है । तो आपको इन दोनों को एक को 9% और एक को 9% देने का नहीं है ।

आपको किस तरह से GST भरना है ?

आपका GST 9% है , तो आपको सिर्फ 9% का ही GST भरना है , 18% का नही । क्यू की इन 9% में से 4.5% S – GST ( State GST ) को जाएगा और 4.5% C – GST ( Central GST )को जाएगा । तो आपका जितना ही GST टैक्स है उतना ही आपको भरना है। ये होता है C – GST ( Central GST ) और S – GST ( State GST )।

UT – GST or I – GST क्या है ?

जो व्यक्ति केंद्रसाशित अंचल Union Territory के अंचल में रहने वाले होते है , उसी व्यक्ति को ही UT – GST का टैक्स भरना है ।

केंद्रसशित अंचल मतलब जो व्यक्ति दिल्ली , पांडिचेरी , लद्दाख या जम्मूकाश्मीर में रहने वाले होते है , उनको UT – GST ( Union Territory ) भरना होता है । इसके साथ इनको C – GST ( Central – GST ) भी भरना है , जो Central Government का हिस्सा है ।

इसमें भी अगर आप किसी समान खरीदते है और उसी समान का GST 9% है । तो आपको 9% का ही GST भरना पड़ेगा । और इस 9% में से 4.5% UT GST ( Union Territory GST ) और 4.5% C – GST ( Central GST ) को जाएगा ।

I – GST ( Integrated GST ) क्या है ?

I – GST या Intergrated GST , ये GST तभी लगता है , जब एक राज्य से दूसरे राज्य को समान भेजा या खरीदा हो । मान लीजिए की उत्तर प्रदेश में समान बना है और उस समान उत्तर प्रदेश से गुजरात आया है और उसी सामान पे I – GST ( Integrated GST ) लगेगा ।

देखिए उत्तर प्रदेश से गुजरात जो समान आया , उसका GST है 12% । उसी 12 % से C – GST ( Central GST ) यानी Central Government ले जाएगा 6 % और 6% गुजरात Government को मिल लाएगा । क्यू की उत्तर प्रदेश में समान बना , और उत्तर प्रदेश से गुजरात समान को भेजा गया ।

इस I – GST ( Intergrated GST ) में तीनों Government को फायदा मिला । क्यू की एक में उत्तर प्रदेश में जो समान बनाया हुआ , उसको रोजगार मिल गया । फिर जो समान पे C – GST ( Central GST ) लगा उसमें Central Government का भी फायदा हुआ और उत्तर प्रदेश से गुजरात जब समान आया , तब I – GST ( Intergrated GST ) के जरिए में गुजरात Government का भी फायदा मिला ।


GST की वजह से भारत के अर्थनीति में बहत बडा फायदा हो रहा है । GST सुचारू रूप से अनुपालन होने के करण व्यवसाय एक एककृत प्रणाली में चलने के साथ साथ आसान सी Input Credit होने का अनुभव भी कर सकता है ।

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